रह रहे है हम एक सुनसान शहर मेंबडी बिपत्ति आई है इस सुनसान शहर में फुरसत न मिली काम से ,ये सोचते थे सब आराम करने को भी एक पहर ढूढते थे सबशोर था ,आवाज थी ,एक घुटन सी थी इस शहर में बस जीने के चंद लम्हो क़ी कमी थी इस शहर मेंसब ठीक था उस रोज ,सब जा रहे थे काम पर सड़को पर भीड़ आम थी गलियों में न आराम था शहर वो ही , वो ही गली ,पर आलम कुछ अलग सा है न शोर है , न लोग है माहौल कुछ अलग सा हैक्या रिश्ते क्या दोस्तीहर जगह भय व्याप्त है हमे छू न ले कोईबस यही अब याद हैसुना है कोई दुश्मन है आया हुआ न हाथ है न हथियार है पर हर जगह छाया हुआहर कोई उससे डर रहा मन भय से है हिल रहा सब काम धाम ठप्प हैओफिस बाजार बंद है बस रहो अपने घर मे हुकूमत की ये गाइडलाइन्स है
रह रहे है हम एक सुनसान शहर में
ReplyDeleteबडी बिपत्ति आई है इस सुनसान शहर में
फुरसत न मिली काम से ,ये सोचते थे सब
आराम करने को भी एक पहर ढूढते थे सब
शोर था ,आवाज थी ,एक घुटन सी थी इस शहर में
बस जीने के चंद लम्हो क़ी कमी थी इस शहर में
सब ठीक था उस रोज ,सब जा रहे थे काम पर
सड़को पर भीड़ आम थी गलियों में न आराम था
शहर वो ही , वो ही गली ,
पर आलम कुछ अलग सा है
न शोर है , न लोग है
माहौल कुछ अलग सा है
क्या रिश्ते क्या दोस्ती
हर जगह भय व्याप्त है
हमे छू न ले कोई
बस यही अब याद है
सुना है कोई दुश्मन है आया हुआ
न हाथ है न हथियार है
पर हर जगह छाया हुआ
हर कोई उससे डर रहा
मन भय से है हिल रहा
सब काम धाम ठप्प है
ओफिस बाजार बंद है
बस रहो अपने घर मे
हुकूमत की ये गाइडलाइन्स है